ग्रंथसार
देवता के थान पर बजने वाले वाद्य केवल ध्वनि नहीं, बल्कि हृदय की धड़कनें हैं जो मनुष्य और ईश्वरीय सत्ता को जोड़ती हैं।
क्षेत्रीय देवी-देवता · पाठ 48
ढोल, शंख और लोक-वाद्य