ग्रंथसार
गाँव की स्त्रियाँ जब उस विशेष धुन को गुनगुनाती हैं, तो लगता है जैसे हवा में साक्षात देव-आशीष तैर रहा है।
क्षेत्रीय देवी-देवता · पाठ 49
केवल उस देवता के लिए गाए जाने वाले गीत