ग्रंथसार
हमारे लोक-देवता शास्त्रों के किसी कठिन पन्ने से नहीं, बल्कि माँ की लोरी और दादी की कहानियों से उपजे हैं, जो हृदय से हृदय तक पहुँचते हैं।
क्षेत्रीय देवी-देवता · पाठ 54
स्थानीय रीति और शास्त्र का अंतर