ग्रंथसार
हर आँगन की अपनी एक मान्यता है, और श्रद्धा की कोई ऊंच-नीच नहीं होती।
क्षेत्रीय देवी-देवता · पाठ 55
परंपराओं का सम्मान और श्रेष्ठता का अभाव