ग्रंथसार
ग़ाज़ीपुर की बैसवारी लोकगायन परंपरा का पूरा कजरी — विरह और भगवान कृष्ण की स्मृति।
लोकगीत · पाठ 43
परदेसिया ने सुधि बिसराई