ग्रंथसार
धौंकनी की धीमी आवाज़ और आग की तपन के बीच, लोहार के औजारों में एक पूरी सभ्यता का श्रम छिपा होता है।
लोक कला एवं शिल्प · पाठ 13
लोहार के औजार