ग्रंथसार
माँ के रसोईघर में चमकते पीतल के बर्तनों की अपनी एक आवाज़ होती है, जो पीढ़ियों के स्नेह और खान-पान की संस्कृति को संजोए रखती है।
लोक कला एवं शिल्प · पाठ 14
पीतल के बर्तन