ग्रंथसार
सुई की नोक और चमकते हुए छोटे-छोटे शीशे जब कपड़े पर मिलते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे रेगिस्तान की तपती रेत पर तारे उतर आए हों।
लोक कला एवं शिल्प · पाठ 28
पश्चिम की दर्पण-कढ़ाई