ग्रंथसार
मजबूत रस्सियों में बंधी हर गांठ, हमारे भरोसे और जीवन की डोर को थामे रखने का प्रतीक है।
लोक कला एवं शिल्प · पाठ 37
रस्सी निर्माण का हुनर