ग्रंथसार
तारों में गूँजती आवाज़ केवल लकड़ी और धागे का मेल नहीं, बल्कि उस कलाकार की साधना है जिसने उसे आवाज़ दी।
लोक कला एवं शिल्प · पाठ 41
तंतु वाद्य यंत्र बनाने वाले