ग्रंथसार
धागों से बंधी एक लकड़ी की आकृति जब नाचती है, तो वह एक निर्जीव वस्तु नहीं, बल्कि एक कहानी का पात्र बन जाती है।
लोक कला एवं शिल्प · पाठ 42
कठपुतली बनाने वाले