ग्रंथसार
कपड़े के टुकड़े पर रंगों का ऐसा अद्भुत मिलन, मानो ईश्वर स्वयं उस रेशे में बस गए हों।
लोक कला एवं शिल्प · पाठ 5
मंदिर का पटचित्र