ग्रंथसार
गाते-गाते घर-घर पहुँचने वाले वे फकीर और गायक, अपनी झोली में कहानियों का पूरा संसार लिए चलते थे।
लोक कला एवं शिल्प · पाठ 53
घुमंतू गायक की आजीविका