ग्रंथसार
सीखने की प्रक्रिया किसी बर्तन के पकने जैसी होती है, जिसमें समय, धैर्य और गुरु की दृष्टि का साथ सबसे जरूरी होता है।
लोक कला एवं शिल्प · पाठ 54
गुरु के साथ शिष्य के वर्ष