ग्रंथसार
हमारे घरों के कारीगर अपने औजारों को केवल लोहे या लकड़ी का टुकड़ा नहीं, बल्कि परिवार का एक अभिन्न सदस्य मानते हैं।
लोक कला एवं शिल्प · पाठ 56
शिल्प ने अपने औजारों को कैसे पुकारा