ग्रंथसार
कारीगर के पसीने की सही कीमत उसे मिले, यह सुनिश्चित करना ही हमारी लोक परंपरा के प्रति सबसे बड़ा सम्मान है।
लोक कला एवं शिल्प · पाठ 58
उचित मूल्य और बिचौलियों की कहानी