ग्रंथसार
चाक की एक घूमती हुई गति में ही मानो पूरी सृष्टि का चक्र और जीवन का अनुशासन छिपा है।
लोक कला एवं शिल्प · पाठ 9
कुम्हार का चाक और दिन की लय