ग्रंथसार
दोपहर की ढलती धूप में जब घर के चौपाल पर रामायण के पाठ की ध्वनि गूंजती है, तो समय ठहर सा जाता है।
त्योहार एवं व्रत · पाठ 27
श्रीराम नवमी