ग्रंथसार
घर के आंगन में जब रामायण की चौपाइयां गूंजती हैं, तो दीवारें भी जैसे पुरानी यादों को गुनगुनाने लगती हैं।
त्योहार एवं व्रत · पाठ 28
श्रीरामचरितमानस का पारायण