ग्रंथसार
आसमान को छूती लपटें और पटाखों की गूंज के बीच, वह शाम हमें सिखाती है कि अंधकार चाहे कितना भी बड़ा हो, उजाले की एक किरण उसे मिटा सकती है।
त्योहार एवं व्रत · पाठ 30
विजयादशमी और रावण-दहन