ग्रंथसार
जिस हाथ ने कलम उठाई या हल पकड़ा, वह हाथ आज रुककर अपने कर्म के साधनों को नमन करता है।
त्योहार एवं व्रत · पाठ 33
आयुध पूजा, विश्वकर्मा पूजा और सरस्वती पूजा