ग्रंथसार
चांदनी रात में छत पर रखी खीर का स्वाद केवल दूध और चावल का नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ जुड़ने का एक उत्सव है।
त्योहार एवं व्रत · पाठ 36
शरद पूर्णिमा