ग्रंथसार
नन्हें हाथों से व्रत का संकल्प लेना बड़ों की दुनिया में प्रवेश करने जैसा होता है।
त्योहार एवं व्रत · पाठ 43
पहला व्रत: सुरक्षित आरम्भ