ग्रंथसार
कुछ सुर केवल खास मौकों पर ही सुनाई देते हैं, जैसे बारिश की पहली बूंद पड़ते ही मिट्टी से सोंधी महक उठती है।
त्योहार एवं व्रत · पाठ 53
पर्व-विशेष के लोकगीत