ग्रंथसार
त्यौहारों की असली शोभा शोर में नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और संयम के शांत भाव में है।
त्योहार एवं व्रत · पाठ 57
पर्यावरण-सम्मत और पशु-संवेदनशील उत्सव