ग्रंथसार
त्योहारों की असली चमक बाज़ार के शोर में नहीं, बल्कि घर की सादगी भरी परंपराओं में छिपी होती है।
त्योहार एवं व्रत · पाठ 58
पर्व में सार्थकता, आडंबर नहीं