ग्रंथसार
हमारी नदियाँ, पर्वत और जंगल केवल भूगोल नहीं, बल्कि साक्षात देवत्व का विस्तार हैं।
आज की धर्म परम्परा · पाठ 4
पारिस्थितिकी और पवित्र भू-दृश्य