ग्रंथसार
भक्ति की धारा ने मंदिरों की दीवारों को लांघकर जन-जन की भाषा में ईश्वर को पुकारना सिखाया।
भक्ति काल · पाठ 4
हृदय के गीत और सबकी पहुँच