ग्रंथसार
ज्ञान और भक्ति की धाराओं का मिलन उस पावन संगम जैसा है जहाँ अलग-अलग दिशाओं से आई नदियाँ एक ही सागर में विलीन हो जाती हैं।
भक्ति काल · पाठ 7
परंपराओं का मिलन और संवाद