ग्रंथसार
सुधारकों के बीच के मतभेद ही वह उर्वर भूमि थे, जहाँ से परंपरा ने आधुनिक युग में अपनी नई पहचान गढ़ी।
नवजागरण · पाठ 8
मतभेद और परंपरा का भविष्य