ग्रंथसार
चारों वेदों के ज्ञाता होकर भी देवर्षि नारद एक दिन गहरे शोक में डूब गए।
अनसुनी कथाएँ · पाठ 111
जब नारद मुनि ने सनत्कुमार से पूछा—सुख कहाँ मिलता है? (संक्षेप)