ग्रंथसार
यह कथा केवल एक राजा और एक वनवासी की नहीं है, यह आत्मा की मित्रता की कथा है, जहाँ पद, जाति या धन का कोई भेद नहीं होता।
अनसुनी कथाएँ · पाठ 124
निषादराज गुह और श्रीराम की मित्रता की अनसुनी कथा (विस्तार)