ग्रंथसार
राजा रहूगण की पालकी बार-बार डगमगा रही थी, क्योंकि उसे उठाने वाला एक कहार धरती पर चींटियों को बचाने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहा था।
अनसुनी कथाएँ · पाठ 143
जड़ भरत ने राजा रहूगण को आत्मज्ञान कैसे समझाया? (संक्षेप)