ग्रंथसार
एक क्षण में ही क्या सम्पूर्ण जीवन का सुख-दुःख भोगा जा सकता है?
अनसुनी कथाएँ · पाठ 147
जब देवर्षि नारद को भगवान विष्णु ने माया का अनुभव कराया (संक्षेप)