ग्रंथसार
पिता से बढ़कर भला क्या हो सकता है? पर एक भक्त के लिए उसकी शिवभक्ति ही सर्वोपरि थी।
अनसुनी कथाएँ · पाठ 157
भक्त चंडेश्वर ने शिव भक्ति के लिए अपने पिता का विरोध क्यों किया? (संक्षेप)