ग्रंथसार
हाथों में समिधा लिए, परम सत्य को जानने की तीव्र इच्छा से छह युवा ऋषि, महर्षि पिप्पलाद के आश्रम पहुँचे।
अनसुनी कथाएँ · पाठ 171
छह जिज्ञासु ऋषि महर्षि पिप्पलाद के पास क्या जानने पहुँचे थे? (संक्षेप)