ग्रंथसार
क्या कोई निर्धन व्यक्ति, एक धनवान सेठ से अधिक सुखी हो सकता है?
अनसुनी कथाएँ · पाठ 229
एक साधारण लकड़हारे को जीवन के सबसे बड़े सुख का ज्ञान कैसे हुआ? (संक्षेप)