ग्रंथसार
क्या कभी ऐसा हो सकता है कि स्वयं काल भी किसी भक्त के सामने झुक जाए?
अनसुनी कथाएँ · पाठ 23
मार्कण्डेय ऋषि को मृत्यु से बचाने की पौराणिक कथा (संक्षेप)