ग्रंथसार
राजा ययाति ने एक हज़ार वर्षों तक इंद्रिय सुख भोगने के बाद यह समझा कि कामनाएँ भोग से नहीं, त्याग से शांत होती हैं।
अनसुनी कथाएँ · पाठ 274
राजा ययाति ने हजार वर्षों तक भोग के बाद क्या समझा? (विस्तार)