ग्रंथसार
क्या हो यदि इस संसार से अन्न का एक-एक दाना लुप्त हो जाए?
अनसुनी कथाएँ · पाठ 287
जब माता पार्वती ने अन्नपूर्णा रूप में संसार को अन्न का महत्व समझाया (संक्षेप)