ग्रंथसार
जब स्वयं भगवान शिव को भी भिक्षा का पात्र लेकर भोजन माँगना पड़ा, तब संसार ने अन्न का वास्तविक मूल्य समझा।
अनसुनी कथाएँ · पाठ 288
जब माता पार्वती ने अन्नपूर्णा रूप में संसार को अन्न का महत्व समझाया (विस्तार)