ग्रंथसार
यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड आखिर किस एक धागे पर बुना हुआ है?
अनसुनी कथाएँ · पाठ 33
जब गार्गी ने याज्ञवल्क्य से ब्रह्मांड का रहस्य पूछा (संक्षेप)