ग्रंथसार
यह कथा है त्याग की उस पराकाष्ठा की, जहाँ एक तपस्वी का नश्वर शरीर, समस्त सृष्टि के कल्याण का माध्यम बन गया।
अनसुनी कथाएँ · पाठ 40
ऋषि दधीचि ने देवताओं के लिए अपनी अस्थियाँ क्यों दान कीं? (विस्तार)