ग्रंथसार
क्या कभी कोई बालक अपने पिता के दिए मृत्यु-भय के सामने भी अपनी भक्ति पर अडिग रह सकता है?
अनसुनी कथाएँ · पाठ 43
प्रह्लाद ने अपने पिता के भय के बावजूद विष्णु भक्ति क्यों नहीं छोड़ी? (संक्षेप)