ग्रंथसार
यह कथा है उस निस्वार्थ मित्रता की, जहाँ एक मुट्ठी चिउड़े के बदले में ब्रह्मांड के स्वामी ने अपना सर्वस्व लुटा दिया।
अनसुनी कथाएँ · पाठ 46
सुदामा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका क्यों पहुँचे? (विस्तार)