ग्रंथसार
क्या आपने कभी सोचा है कि हमारा मन इतना बेचैन, इतना चंचल क्यों रहता है?
अनसुनी कथाएँ · पाठ 59
जब अर्जुन ने श्रीकृष्ण से पूछा—मन इतना चंचल क्यों है? (संक्षेप)