ग्रंथसार
यह वह कथा है जब परम ज्ञान ने विशुद्ध प्रेम के सामने अपना मस्तक झुका दिया।
अनसुनी कथाएँ · पाठ 65
उद्धव को गोपियों ने प्रेम और भक्ति का क्या अर्थ समझाया? (संक्षेप)