ग्रंथसार
महाभारत का महायुद्ध समाप्त हो चुका था, पर पाण्डव शिविर में आनन्द की जगह गहरा शोक छाया हुआ था।
अनसुनी कथाएँ · पाठ 97
अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित को जीवनदान मिलने की कथा (संक्षेप)