ग्रंथसार
एक जिज्ञासु शिष्य ने अपने गुरु से पूछा, “गुरुजी, कहते हैं कि ईश्वर कण-कण में हैं, तो फिर वे हमें दिखाई क्यों नहीं देते?”
आध्यात्मिक जीवन की छोटी कहानियाँ · पाठ 2
हम ईश्वर को क्यों नहीं देख पाते?