ग्रंथसार
एक भौंकते हुए कुत्ते का मुँह बाणों से इस तरह भर गया, कि उसे एक खरोंच भी नहीं आई और उसका भौंकना भी बंद हो गया।
महाभारत की अनसुनी कथाएँ · पाठ 1
एकलव्य की गुरुदक्षिणा